स्मार्ट सिटी में चार फीट पानी! करोड़ों की योजनाओं के बीच प्रयागराज क्यों डूबा?
- Posted By: Admin
- उत्तर प्रदेश
- Updated: 17 August, 2026 19:24
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घुटने से चार फीट तक पानी, घरों में घुसा पानी, सड़क पर डूबीं कारें-बाइकें और गलियों में उतरी NDRF की नाव — आखिर स्मार्ट सिटी के नाम पर हुआ क्या?
प्रयागराज। रविवार देर रात हुई भारी बारिश ने सोमवार को प्रयागराज की जलनिकासी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने रख दी, जिसने शहर की तथाकथित स्मार्ट सिटी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिविल लाइंस, जार्जटाउन, कटरा, निरंजन डॉट पुल, लीडर रोड, राजरूपपुर, चौक, दारागंज, टैगोर टाउन, अलोपीबाग, करेली समेत कई इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित रहा। कई स्थानों पर सड़कों और गलियों में घुटने से अधिक पानी भर गया, जबकि करेली की कुछ कॉलोनियों और गलियों में पानी करीब चार फीट तक पहुंचने की जानकारी सामने आई।
हालात इतने गंभीर हुए कि करेली में NDRF की टीम को नाव के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन में उतरना पड़ा। कई घरों में पानी घुस गया और लोग अपने घरों की पहली मंजिल पर रहने को मजबूर हो गए। सड़क पर खड़ी कारें और बाइकें पानी में डूबती नजर आईं।
सबसे बड़ा सवाल—स्मार्ट सिटी आखिर किसके लिए?
प्रयागराज को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर वर्षों से योजनाएं, परियोजनाएं और करोड़ों रुपये के विकास कार्य किए गए। लेकिन एक रात की भारी बारिश ने शहर की सड़कों और कॉलोनियों में जो तस्वीर दिखाई, उसने कई बुनियादी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या स्मार्ट सिटी का मतलब केवल सड़क, लाइट और सौंदर्यीकरण है?
अगर शहर की बारिश का पानी निकालने की व्यवस्था ही प्रभावी नहीं है और लोगों को घरों से निकालने के लिए NDRF की नाव बुलानी पड़ रही है, तो फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है?
जिम्मेदारों से सीधे सवाल
1. स्मार्ट सिटी परियोजना में जलनिकासी और ड्रेनेज सिस्टम को कितना महत्व दिया गया?
2. प्रयागराज में जलभराव रोकने के लिए अब तक कितनी धनराशि खर्च की गई?
3. किन-किन नालों और ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता बढ़ाई गई और उसका परिणाम आज जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
4. बारिश से पहले नालों और प्रमुख जलनिकासी मार्गों की सफाई का दावा किया गया था तो फिर इतनी जल्दी सड़कें और गलियां तालाब में कैसे बदल गईं?
5. क्या शहर की नई सड़कों और विकास परियोजनाओं में प्राकृतिक जलनिकासी के रास्तों का पर्याप्त ध्यान रखा गया?
6. जिन इलाकों में हर वर्ष जलभराव होता है, वहां स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया?
7. क्या जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों की कोई वैज्ञानिक मैपिंग और स्थायी कार्ययोजना तैयार की गई है?
8. यदि की गई है तो उसके बावजूद आज भी लोगों के घरों में पानी क्यों घुस रहा है?
NDRF की नाव बनी शहर की जलनिकासी व्यवस्था की तस्वीर
करेली के जसीर की पुलिया के पास भारी बारिश के बाद स्थिति गंभीर हो गई। कई घरों में पानी भरने की सूचना पर एसीपी अतरसुइया राम सिंह और NDRF की टीम मौके पर पहुंची। नाव की मदद से घरों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
यह तस्वीर केवल एक मोहल्ले की परेशानी नहीं है। यह सवाल है कि जिस शहर को स्मार्ट बनाने की योजनाएं बनाई गईं, उसी शहर में बारिश के पानी के बीच नागरिकों को नाव के सहारे सुरक्षित निकालने की नौबत क्यों आई?
CM तक पहुंचना चाहिए यह सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय को इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर यह देखना चाहिए कि प्रयागराज में जलनिकासी से जुड़ी परियोजनाओं पर कितना खर्च हुआ और उसका वास्तविक परिणाम क्या निकला।
जरूरत केवल राहत और रेस्क्यू की नहीं है। जरूरत उस सिस्टम की समीक्षा की है जिसके भरोसे शहर को स्मार्ट बनाया जा रहा है।
बारिश हर साल होगी। सवाल यह है कि क्या प्रयागराज हर साल इसी तरह डूबता रहेगा या जिम्मेदार विभाग इस बार जलभराव का स्थायी समाधान निकालेंगे?
प्रयागराज की तस्वीरें बहुत कुछ कह रही हैं
चार फीट पानी में डूबी गलियां।
घर में घुसा बारिश का पानी।
पानी में डूबीं कारें और बाइकें।
और लोगों को बचाने के लिए सड़क पर NDRF की नाव।
अब सवाल जनता पूछ रही है—
अगर यह स्मार्ट सिटी है, तो फिर बारिश में प्रयागराज की यह हालत क्यों?
प्रयाग दर्पण की ग्राउंड रिपोर्ट — अब जवाबदेही जरूरी है।
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