मुख्यमंत्री के आदेश और ज़मीनी हकीकत — ठंड हटाने के नाम पर इंतज़ाम हटे, बाज़ार गर्म!
- Posted By: Admin
- उत्तर प्रदेश
- Updated: 14 January, 2026 10:29
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🔥 महाब्रेकिंग न्यूज़ |माघ मेला क्षेत्र जीरो ग्राउंड एक्सपोज़े 🔥
प्रयागराज।
माघ मेला क्षेत्र में ठंड से बचाव की स्थिति अब केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि खुली लूट और बाज़ारवाद का रूप ले चुकी है।
ग्राउंड ज़ीरो की सच्चाई यह है कि माघ मेला क्षेत्र में न पुआल की व्यवस्था है, न अलाव की—और जो कुछ मिल रहा है, वह खुले बाज़ार में मनमाने दामों पर।
माघ मेला क्षेत्र: व्यवस्था गायब, कालाबाज़ारी चालू
- पूरे माघ मेला क्षेत्र में प्रशासन द्वारा न पुआल दिया जा रहा है, न अलाव जलाए जा रहे हैं
- मेला स्टोरों से साफ़ जवाब मिलता है—
“अब पुआल नहीं मिलता, खुद खरीदिए।”
पर इसके बाद जो हो रहा है, वह और भी गंभीर है—
लकड़ी और पुआल के दाम सुनकर चौंक जाएंगे
- लकड़ी खुलेआम ₹20 प्रति किलो के हिसाब से बेची जा रही है
- पुआल के कोई तय दाम नहीं
- किसी को ₹50 में छोटा गट्ठर
- किसी को ₹100 में वही पुआल
- और किसी से इससे भी ज़्यादा वसूली
मतलब साफ़ है—
👉 जिससे जितना पैसा निकल जाए, उतना वसूलो।
यह वही पुआल है—
- जो पहले प्रशासन निःशुल्क उपलब्ध कराता था
- जो ठंड में कल्पवासियों की बुनियादी आवश्यकता है
कल्पवासी ठंड में, व्यापारी मुनाफ़े में
परिणाम यह है कि—
- कल्पवासी गंगा माँ की अत्यंत ठंडी रेत पर ज़मीन में सिमटकर रात काट रहे हैं
- और पुआल व लकड़ी का बाज़ार
ठंड में भी पूरी तरह गर्म है
तो फिर महीनों की तैयारी किस बात की?
जब—
- माघ मेला की तैयारी महीनों पहले होती है
- कमिश्नर प्रयागराज स्वयं बैठकर
मॉनिटरिंग, टेंडर, विभाग और ज़िम्मेदारियाँ तय करते हैं
तो फिर सवाल उठता है—
- क्या पुआल और अलाव की कोई योजना नहीं बनाई गई?
- या फिर जानबूझकर व्यवस्था हटाकर
आम जनता को बाज़ार के हवाले कर दिया गया?
मेला क्षेत्र से बाहर भी यही कहानी
स्थिति केवल माघ मेला तक सीमित नहीं—
- प्रयागराज के किसी भी प्रमुख चौराहे पर प्रशासनिक अलाव नहीं
- लकड़ी बाज़ार में बिक रही है,
लेकिन गरीब के लिए आग जलाने की जगह नहीं
आदेश ऊपर से, अमल नीचे उलटा
माननीय मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं— ठंड से बचाव के लिए हर संभव उपाय किए जाएँ।
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह बन गई है—
ठंड से निपटने के नाम पर इंतज़ाम हटाए गए,
और बाज़ार को खुली छूट दे दी गई।
यही है जीरो ग्राउंड लेवल की असली सच्चाई
यह कोई आरोप नहीं,
यह कोई राजनीति नहीं—
यह वह सच्चाई है—
- जो हर कल्पवासी रात में झेल रहा है
- जो हर गरीब सुबह महसूस कर रहा है
यहाँ—
- फ़ाइलें गर्म हैं
- व्यापारी मुनाफ़े में हैं
- और जनता ठंड में जमी हुई है
🔥 यह केवल अव्यवस्था नहीं,
यह संवेदनहीनता और सिस्टम की विफलता का जीवंत प्रमाण है।
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