Friday 16 Jan 2026 1:58 AM

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श्रद्धा ठिठुर रही, अफसर सो रहे — ‘फोन राज’ में कैद माघ मेला;


कुर्सियाँ खाली, बाबुओं की जेबें भारी — मेला नहीं, लूट और लापरवाही का अखाड़ा**


प्रयागराज।

श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपरा का प्रतीक माघ मेला इस समय प्रशासनिक अकर्मण्यता, अफसरशाही के अहंकार और बाबूशाही के वर्चस्व का शिकार बनता जा रहा है। मेला क्षेत्र में हालात ऐसे हैं कि आम श्रद्धालु, सामाजिक संस्थाएं और कार्यक्रम आयोजक मूलभूत सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आम जनता की पहुंच से पूरी तरह दूर हो चुके हैं।


स्थिति यह है कि माघ मेला क्षेत्र के अधिकारी अब सीधे मिलने योग्य नहीं रह गए हैं। मुलाकात केवल “ऊपर के अधिकारियों के फोन” से ही संभव है। बिना सिफारिश न सुनवाई है, न समाधान। मेला कार्यालयों में अधिकारी नहीं मिलते, लेकिन बाबुओं का रौब ऐसा है मानो वही पूरे मेला प्रशासन के संचालक हों।


सबसे गंभीर आरोप यह है कि लोग अपने कार्यक्रमों की अनुमति, बिजली, पानी, अलाव, पुआल, शौचालय और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए मनमाना पैसा देने को भी तैयार हैं, इसके बावजूद जवाब एक ही मिलता है—

“अधिकारी बैठ नहीं रहे, क्षेत्र में व्यस्त हैं, मुलाकात संभव नहीं है।”


प्रश्न यह उठता है कि यदि अधिकारी क्षेत्र में ही व्यस्त हैं, तो फिर जनता की पीड़ा कौन सुनेगा?

मेला क्षेत्र में अलाव और पुआल की भारी कमी, ठंड से ठिठुरते श्रद्धालु, अव्यवस्थित शौचालय, अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और पेयजल संकट ने माघ मेला की व्यवस्थाओं की जमीनी सच्चाई उजागर कर दी है।


स्थानीय लोगों और आयोजकों का कहना है कि मेला प्राधिकरण प्रयागराज केवल कागजी व्यवस्थाओं और बैठकों तक सीमित रह गया है। जमीनी स्तर पर न अधिकारी दिखते हैं, न समाधान। पूरा तंत्र बाबुओं के इशारों पर चलता प्रतीत हो रहा है, जहाँ बिना “अनकही व्यवस्था” के फाइल आगे नहीं बढ़ती।


यह स्थिति केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है। माघ मेला जैसे विराट आयोजन में यदि आम जनता और श्रद्धालु ही उपेक्षित रह जाएं, तो यह प्रशासन की गंभीर विफलता मानी जाएगी।


अब जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि—


क्या माघ मेला सिर्फ वीआईपी और फाइलों के लिए रह गया है?


क्या अधिकारी केवल फोन और सिफारिशों के लिए हैं?


क्या मेला प्राधिकरण प्रयागराज जनता के प्रति जवाबदेह है या नहीं?



यदि शीघ्र ही मेला क्षेत्र में अधिकारियों की नियमित उपस्थिति, सीधी जनसुनवाई और मूलभूत सुविधाओं की तत्काल बहाली सुनिश्चित नहीं की गई, तो बढ़ता जनआक्रोश प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मेला प्राधिकरण प्रयागराज पर होगी।


— समाचार समाप्त


यदि चाहें तो मैं इसे


और आक्रामक संस्करण,


फ्रंट पेज + इनसाइड पेज कट,


या मुख्यमंत्री/मुख्य सचिव को टैग करने योग्य संस्करण में भी ढाल सकता हूँ।

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