न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने तेहरान को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा और दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा मददगार बताया। ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, परमाणु इरादे नहीं छोड़ता और आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक दबाव जारी रहेगा। उन्होंने सभी देशों से अपील की कि वे ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ दें।
🔴 “डील या खेल खत्म”
अपने भाषण में ट्रंप ने बार-बार एक “बड़े फैसले” की बात दोहराई। उन्होंने कहा — “मुझे एक बड़ा फैसला लेना है। या तो हम पहले से बेहतर देश बनाएंगे, या मैं उन्हें खत्म कर दूं ताकि वे किसी को नुकसान न पहुंचा सकें।”
यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में उन्होंने संकेत दिया था कि ईरान युद्ध में अमेरिका एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
🗳️ चुनावी रणनीति और समझौते की संभावना
ट्रंप ने कहा कि 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिका ईरान के साथ समझौता कर सकता है। उनके अनुसार, “मुझे लगता है हम चुनाव के ठीक बाद डील कर लेंगे, क्योंकि उनके लिए ऐसा न करना समझदारी नहीं है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि तेहरान फिलहाल अमेरिकी राजनीति के नतीजे का इंतजार कर रहा है और उसी आधार पर आगे का कदम तय करेगा।
🚶♂️ ईरानी प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट
जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य हमलों का जिक्र किया, तो ईरानी प्रतिनिधिमंडल सभागार से बाहर चला गया। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अवरुद्ध करने की ईरान की कोशिश ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल दिया था, इसलिए अमेरिका को सख्त रुख अपनाना पड़ा।
☢️ “ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलेगा”
ट्रंप ने दोहराया कि इस्लामिक रिपब्लिक को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे इस खतरे को अधूरा नहीं छोड़ेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म हो।
🌍 अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव की रणनीति
अपने भाषण में ट्रंप ने साफ किया कि ईरान पर आर्थिक घेराबंदी और कूटनीतिक अलगाव बढ़ाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर तेहरान हमले बंद करे, परमाणु कार्यक्रम छोड़े और आतंकवाद को समर्थन देना बंद करे, तो बेहतर समझौते का रास्ता खुल सकता है।
कुल मिलाकर, ट्रंप ने UNGA मंच का इस्तेमाल ईरान को चेतावनी देने, सहयोगी देशों से समर्थन मांगने और घरेलू चुनावी राजनीति से जोड़कर अपनी रणनीति स्पष्ट करने के लिए किया।
Comments